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vivek1959


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सबकी सेल्फी हिट हो

Posted On: 10 Apr, 2017  
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आंकड़ेबाजी

Posted On: 3 Mar, 2017  
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वैमनस्य भूल कर नई शुरुवात करने का पर्व होली

Posted On: 3 Mar, 2017  
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बसन्ती और बसन्त

Posted On: 6 Feb, 2017  
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बजट देश का बनाम घर का

Posted On: 29 Jan, 2017  
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मिले दल मेरा तुम्हारा

Posted On: 29 Jan, 2017  
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गुमशुदा पाठक की तलाश

Posted On: 16 Jan, 2017  
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काश्मीर में पंडितो की पुनर्स्थापना

Posted On: 3 Jul, 2016  
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के द्वारा: vivek1959 vivek1959

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा: vivek1959 vivek1959

के द्वारा: vivek1959 vivek1959

विवेक जी, सादर नमस्कार. आपने अपने माता-पिता के बारे में जो लिखा वो स्पष्ट करता है के आप उनसे कितने प्रभावित हैं. आप के संस्मरण को पढ़ कर मैं भी उन्हें प्रणाम करने के अवसर से चूकना नहीं चाहता. आपका पुण्य के आप को ऐसे माता-पिता का सानिध्य मिला और समाज का सौभाग्य के उन्हें इतने कर्तव्यनिष्ठ अध्यापक मिले . लेकिन विवेकजी, आज स्थितयां बदल चुकी हैं . आज शिक्षा दान, व्यवसाय बन कर रह गया है .मोटी फीस देकर शिक्षा खरीदने वाले, अध्यापक को गुरु नहीं एक नौकर का दर्जा देते हैं. राजकीय विद्यालयों का स्तर तो इतना गिर चुका है के अध्यापकों को अपने वेतन और भत्तों को लेकर होने वाले झगड़ों से ही फुर्सत नहीं मिलती. अध्यापक मोटी पगार पाते हैं लेकिन काम के नाम पर सारा दिन कुर्सी तोड़ने के सिवा कुछ नहीं करते. माता -पिता भी जो पहले अपने बच्चे को शिक्षक को सौंप कर निश्चिंत हो जाया करते थे, आज बात बेबात अध्यापकों को घुड़की देते हैं. नतीजा बच्चे न तो अध्यापकों के नियंत्रण में हैं न ही माता-पिता के. हालाँकि अपवाद हैं जो इस दूषित हो चुकी शिक्षा व्यवस्था में शीतल और स्वच्छ हवा के झोंकें के सामान हैं. उन्हें मेरा प्रणाम. आप के सुन्दर और प्रेरणास्पद संस्मरण के लिए आप को बधाई और भविष्य के शुभकामनाएं. नमस्ते जी.

के द्वारा: Ravinder kumar Ravinder kumar

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आदरणीय विवेक रंजन जी, सादर अभिवादन! आपने विस्तृत तकनीकी, राजनीतिक, सामजिक पहलुओं पर विश्लेषण करते हुए बहुत ही उपयोगी आलेख प्रस्तुत किया है..... आप अपने देश की राजनीति, राजनीति में भ्रष्टाचार इत्यादि सभी बातों को अच्छी तरह समझते हैं. आपकी सलाह भी सराहनीय है .... पर राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी, स्वार्थ से लिप्त विरोध, विस्थापितों के साथ उचित न्याय न होना, ये सभी ज्वलंत समस्याएं हैं जिनका निराकरण निःस्वार्थ चिंतन के द्वारा ही संभव है. आपका आलेख सराहनीय है और आप सम्बंधित विभाग से भी है,जहाँ आप अपनी राय रख सकते हैं. सबसे बड़ी बात तो यह है कि आप खुद जनसंपर्क अधिकारी हैं जिसमे आपकी रचनात्मक पहल को अवश्य ही समझा जाना चाहिए!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

विवेक जी..बधाई, अच्छे लेख पर... सही कहा आपने... आरक्षण की जिन्हें ज़रुरत उन्हें उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है.... उसका लाभ बहुत सीमित लोगो को ही मिल पाया...इसका दरुपयोग हो रहा है ... हमारे collage के दिनों में मेरी एक सहेली थी, जो शायद OBC में आती थी, परन्तु उसके पिता उच्च श्रेणी के कर्मचारी थे (creamy layer), जिस वजह से मेरी सहेली इस आरक्षण का लाभ नहीं उठा सकती थी... एक दिन उसने मुझे बताया की, उसका native प्लेस में उनकी पारिवारिक कृषि चलती थी, जिसकी आड़ लेकर उन्होंने, कुच्छ ऐसे जातीय कागजात बनवा लिए, जो गैकनूनी थे..... पर उन कागज़ातो के तहत, उसका PSC में चयन हो गया और आज वह क्लास वन ऑफिसर है..... क्या विडम्बना है......शायद इस जगह की सही हकदार कोई और थे....

के द्वारा: abhilasha shivhare gupta abhilasha shivhare gupta

के द्वारा: vivek1959 vivek1959

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के द्वारा: vivek1959 vivek1959

के द्वारा: vivek1959 vivek1959

महात्मा बुद्ध के आख्यान से हिंस्र अंगुलीमाल अहिंसक बन सकता है , कोई चाण्डाशोक, अशोक महान बन सकता है , तो प्रेरक कथानको का हमारे जीवन में हमारी वैचारिक सोच को बदलने में , महत्व निर्विवाद है . विद्यालयो में सुबह की प्रार्थना के समय छात्रो को ध्यानस्थ अवस्था में प्रेरक कहानियां , सकारात्मक संस्मरण , महापुरुषो की जीवनियां उद्‌बोधन व आख्यान के रूप में सुनाकर उनका भावान्तरण किया जा सकता है . हमारे वेद, उपनिषद, पुराण , इतिहास और आधुनिक विज्ञान की घटनायें सकारात्मक उद्धरणों से लबरेज हैं . ऋषि कुल की परम्परा के अनुरूप , गुरू और शिष्य के बीच स्थापित तादात्म्य से उपजी वैचारिक सभायें नित नवीन सम्भावनाओं को जन्म दे सकती हैं. ........विचारणीय और पालनीय.......हार्दिक आभार.

के द्वारा: अनिल कुमार ‘अलीन’ अनिल कुमार ‘अलीन’

आपने एक बहूत महत्वपूर्ण विषय को बहूत कम शब्दों में पिरोकर इस विकराल समस्या पर चिंतन करने का आवाहन किया है उसके लिए साधुवाद. यह दौर भारतीय संस्कृत में बहूत कुछ बदलाव का दौर है. इन्टरनेट की सुलभता ने जहां इसकी अपार शक्ति को जनमानस तक पहुंचा कर हज़ारों सालों की कुछ कमियों को कुछ पलों में दूर कर दिया है वहीँ इस सिक्के के दुसरे चेहरे में छिपे सेक्स और नारी सम्मोहन से युवावर्ग को ही नहीं कुर्सियों पर बैठे नेताओं रक को इसका वशीभूत. जिसका परिणाम है उभरते हुए सेक्स घोटाले और स्केंडलस. वृन्दावन और गोकुल के आस पास को World Heritage बना कर ( "आईये वृन्दावन और गोकुल बचाएं" पहला चरण ) अपने देश के गौरव और सांस्कृतिक विरासत को बचाने हतु एक छोटा सा प्रयास मेरा भी है कृपया Signature Campaign में आप अपना बहुमूल्य सहयोग दे कर इसे अपना प्रयास बनाने के लिए आगे आयें. ये मातृभूमि आपकी ऋणी रहेगी. सुभकामनाओं के साथ...रवीन्द्र

के द्वारा: Ravindra K Kapoor Ravindra K Kapoor

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